हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रशासनिक तबादले से वनरक्षकों की वरिष्ठता नहीं होगी खत्म, 2014 का प्रावधान रद्द
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- प्रशासनिक तबादला कर्मचारी की गलती नहीं, 90 दिनों में दोबारा तय करनी होगी याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता
बिलासपुर, 10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वन विभाग के वनरक्षकों की वरिष्ठता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आधार पर एक वनवृत्त से दूसरे वनवृत्त में तबादला होने मात्र से कर्मचारी की भर्ती के समय अर्जित वरिष्ठता समाप्त नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने वन विभाग द्वारा 31 जुलाई 2014 को जारी सर्कुलर के क्लॉज-5 को इस सीमा तक मनमाना और वैधानिक नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान उन वनरक्षकों पर लागू नहीं किया जा सकता, जिनकी नियुक्ति सीधी भर्ती से हुई थी और बाद में उन्हें प्रशासनिक आधार पर दूसरे वनवृत्त में स्थानांतरित किया गया।
तबादले के बाद वरिष्ठता सूची में नीचे कर दिया गया था
मामला उन वनरक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति 5 जनवरी 2013 को छत्तीसगढ़ क्लास-III फॉरेस्ट सर्विस रिक्रूटमेंट रूल्स, 2012 के तहत हुई थी। उनकी प्रारंभिक पोस्टिंग गरियाबंद वनमंडल में हुई थी। बाद में प्रशासनिक आधार पर उन्हें बिलासपुर, मुंगेली और कोरबा वनवृत्त में स्थानांतरित किया गया।
तबादले के बाद संबंधित कर्मचारियों को नए वनवृत्त की वरिष्ठता सूची में नीचे कर दिया गया। 1 सितंबर 2025 की ग्रेडेशन लिस्ट में कुछ कर्मचारियों के नाम के सामने ‘अन्य वृत्त से स्थानांतरण’ का उल्लेख करते हुए उन्हें वरिष्ठता में नीचे रखा गया था।
कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी नियुक्ति सीधी भर्ती और मेरिट के आधार पर हुई थी। भर्ती के समय प्राप्त उनके अंक भी सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापित किए गए थे। इसलिए केवल प्रशासनिक तबादले के कारण उनकी मूल वरिष्ठता समाप्त नहीं की जा सकती।
दूसरी ओर, विभाग ने 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा था कि एक वनवृत्त से दूसरे वनवृत्त में स्थानांतरण होने पर कर्मचारी की वरिष्ठता नए वनवृत्त में पहले से कार्यरत सीधी भर्ती एवं पदोन्नत कर्मचारियों के नीचे निर्धारित की जानी चाहिए।
वरिष्ठता कर्मचारी का महत्वपूर्ण सेवा अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि वरिष्ठता कर्मचारी का महत्वपूर्ण सेवा अधिकार है, जिसका सीधा प्रभाव पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक या जनहित में किया गया तबादला कर्मचारी का स्वैच्छिक निर्णय नहीं होता। इसलिए ऐसे आदेश का पालन करने के कारण कर्मचारी को उसकी पहले से अर्जित वरिष्ठता से वंचित करना उचित नहीं है।
कोर्ट ने माना कि 1961 के नियमों का नियम 12(2)(बी) उन मामलों में लागू होता है, जहां स्थानांतरण भर्ती का माध्यम होता है। लेकिन मौजूदा मामले में संबंधित वनरक्षकों की नियुक्ति सीधी भर्ती से हुई थी।
90 दिनों में दोबारा तय करनी होगी वरिष्ठता
हाईकोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता के दावे पर दोबारा विचार किया जाए। वरिष्ठता तय करते समय 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर के क्लॉज-5 को नजरअंदाज करते हुए भर्ती के समय प्राप्त मूल मेरिट और लागू वैधानिक नियमों को आधार बनाया जाए।
यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। इसके साथ ही 25 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन खारिज किए जाने की कार्रवाई को भी कोर्ट ने निरस्त कर दिया है।
अन्य कर्मचारियों की वरिष्ठता स्वतः प्रभावित नहीं होगी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले से वर्तमान वरिष्ठता सूची में शामिल उन कर्मचारियों की वरिष्ठता स्वतः प्रभावित नहीं होगी, जो इन याचिकाओं में पक्षकार नहीं हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुनवाई का अवसर देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।



